अपने स्वारथ की खातिर ये, अपनी माँ को छलते है.
माँ तेरे बच्चे तेरे तन का, खून चूस कर बड़ते है,
नहीं शर्म है, ना कोई भय है, सब स्वारथ की भेंट चड़े.
ये तो भोगे इस जीवन को, माँ कल मरती आज मरे,
अपने स्वारथ की खातिर--------------
(१)
पद और सत्ता का मद है, ना तेरा कुछ ध्यान करे,
भोग विलास की खातिर, माँ की आहं उपहास बने,
माँ के कुचलते अरमानो को, ये कैसा अट्टहास करे,
ये तो भोगे इस जीवन को, माँ कल मरती आज मरे,
अपने स्वारथ की खातिर--------------
(२)
अपने स्वारथ की खातिर ये, माँ का सौदा करते है,
भारत माता के आँचल मई, ये खून चूसकर बड़ते है,
वतन के इन गद्दारों को हम, फिर क्यों जय-जयकार करे,
ये तो भोगे इस जीवन को, माँ कल मरती आज मरे,
अपने स्वारथ की खातिर--------------
(३)
इस जीवन का अर्थ नहीं जो, माँ के रज-कण साथ नहीं,
सब कुछ संभव है दुनिया मै, पर माँ जैसा प्यार नहीं,
माँ के चरणों मै अपना, जीवन ये बलिदान करे,
भारत माँ अपने बच्चो पर, फिर क्यों ना अभिमान करे,
अपने स्वारथ की खातिर--------------------
इति !!
